SHIVPURI NEWS-पर्यटन और पुरातत्व विभाग की अनदेखी के कारण जर्जर होता -कपिल मुनि आश्रम

कोलारसः संरक्षण नहीं होने से अपना सौंदर्य खो रहा है कपिल मुनि अश्राम
युगों पुराना हैं स्थल, खुदाई में मिलते हैं शिव पूजा के प्रमाण भक्तों को ठहरने के लिए पूर्व विधायक स्व. रामसिंह यादव ने कराया था मंगलम भवन का निर्माण बदरवास।  कोलारस अनुभाग के ग्राम पंचायत तुड़यावद के अंतर्गत आने वाला कपिल मुनि आश्रम कैलधार पर्यटन और पुरातत्व विभाग की अनदेखी के कारण जर्जर होता जा रहा है। विभागीय अधिकारियो
युगों पुराना हैं स्थल, खुदाई में मिलते हैं शिव पूजा के प्रमाण

भक्तों को ठहरने के लिए पूर्व विधायक स्व. रामसिंह यादव ने कराया था मंगलम भवन का निर्माण

कोलारस अनुभाग के ग्राम पंचायत तुड़यावद के अंतर्गत आने वाला कपिल मुनि आश्रम कैलधार पर्यटन और पुरातत्व विभाग की अनदेखी के कारण जर्जर होता जा रहा है। विभागीय अधिकारियों की की लापरवाही के चलते कैलधार में बनी छतरियां और प्राकृतिक सौंदर्य नष्ट होता जा रहा है। धीरे-धीरे जर्जर हो रही छतरियों का संधारण कराए जाने के लिए ग्रामीण एवं महंत यज्ञ नारायण भारती कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मांग कर चुके हैं, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया है।

महंत यज्ञनारायण भारती ने बताया कि कपिल मुनि आश्रम में पहले संतो की 360 समाधियां बनी हुई थी। जो संरक्षण नहीं होने के कारण धीरे-धीरे धराशायी हो गई। वर्तमान में 18 समाधियां बनी हुई है जिसमें 10 समाधियां पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और कभी भी धराशायी हो चुकी है। उन्होने बताया कि हमारे पूर्वज रियासत काल से कपिल मुनि आश्रम में पूजा अर्चना करते आ रहे हैं। इसके हमारे पास प्रमाण हैं। यहां पर भगवान शंकर के 2 मंदिर और 12 ज्योतिर्लिंग बने हुए निकले है जो धीरे-धीरे जर्जर हो रहे हैं। कपिल मुनि आश्रम में एक विशाल शिवलिंग के साथ ममलेश्वर शिवलिंग बना है और वर्षो पुराने अर्जुन वृक्ष पाए जाते हैं। आश्रम में एक कुंड बना है जिसे ग्रामीण बिंद सरोवर के नाम से जानते हैं। वहीं गौमुख से सदा बहने वाला जल भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

मकर सक्रांति पर प्रतिवर्ष लगता है 2 दिन का मेला

कपिल मुनि आश्रम जाने के लिए लुकवासा और कुल्हाड़ी से दो मार्ग हैं। किसी भी मार्ग जाने पर दूरी 8 किलोमीटर ही रहती है। आश्रम में हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मकर सक्रांति के अवसर पर दो दिवसीय मेला लगता है। यह मेला रियासत काल से लगता चला रहा है। मेले में आने वाले भक्तों को ठहरने के लिये पूर्व विधायक स्व. रामसिंह यादव ने विधायक निधि से तीन वर्ष पूर्व मंगलम भवन का निर्माण भी करवाया हैं।

यहां संतों की 360 समाधि के प्रमाण मिलते हैं जो वर्तमान में घटकर 18 रह गई हैं। कुछ ही वर्षों में यह संख्या घटकर 8 रह जाएगी क्योंकि 10 समाधियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। रियासत काल से हमारा परिवार कपिल मुनि की पूजा कर रहा है।

यज्ञनारायण भारती, महंत कपिल मुनि आश्रम

यह आश्रम महर्षि कदम की तपोस्थली मानी जाती है। यहीं पर कपिल मुनि ने तपस्या की एवं अपनी माता को शिष्य बनाकर सांख्य शास्त्र का उपदेश दिया था। ऐसी मान्यता हैं जमीन खुदाई में दो शिवजी के मंदिर सहित 12 ज्योतिर्लिंग भी निकलने हैं। जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। खुदाई में अक्सर गणेश,माता पार्वती एवं शिव लिंग मिलते हैं। शिव पूजा के प्रमाण यहां पर मिलते रहते हैं।

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