बिग बी का ब्लॉग:पोलैंड में स्टूडेंट्स को पिता की रचना गाते देख भावुक हुए अमिताभ, बोले- पहला कदम रखते ही व्रोकला शहर से प्यार हो गया था

मुंबई के नानावटी अस्पताल के कोविड आइसोलेशन वार्ड में भर्ती अमिताभ बच्चन का वहां आज (बुधवार) 12वां दिन है। इससे पहले मंगलवार शाम को उन्होंने सोशल मीडिया पर पोलैंड के व्रोकला शहर का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें कुछ स्टूडेंट्स उनके पिता हरिवंशराय बच्चन की प्रसिद्ध रचना ‘मधुशाला’ का पाठ करते दिखे। इसी वीडियो के बारे में उन्होंने अपने ब्लॉग पर भी लिखा, और उस शहर से जुड़ी अपनी यादों को शेयर किया।

बिग बी की मानें तो वे इस वीडियो को देखने के बाद इतने इमोशनल हो गए कि अपने आंसू नहीं रोक पाए। ब्लॉग में अमिताभ ने खुद को इस बात के लिए खुशनसीब बताया कि वे हरिवंशराय बच्चन के बेटे हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार व्रोकला शहर में पैर रखा था उसी दिन उन्हें इस शहर से प्यार हो गया था। क्योंकि वहां उन्हें बेहद अपनापन मिला था। 

वीडियो को देख मेरी आंखों में आंसू आ गए

अमिताभ ने ब्लॉग को शुरू करते हुए लिखा, ‘व्रोकला शहर और उसके महापौर के इस काम को देख मेरी आंखों में आंसू आ गए… इस मुश्किल समय में बाबूजी के लिए इतनी ज्यादा गरिमा और सम्मान रखना मेरी भावनात्मक संतुष्टि से परे है… उनका बेटा होकर मैं भाग्यशाली महसूस करता हूं… मैं भाग्यशाली हूं जो वे अपने पीछे सम्मान और मूल्यों की इस तरह की विशाल विरासत को पीछे छोड़कर गए हैं… मैं भाग्यशाली हूं कि वे दुनियाभर के साहित्यिक मूल्यों में दिए गए विचारों और आभारों को समझते हैं और उसका सम्मान करते हैं।’

‘इन छात्राओं ने बाबूजी की मधुशाला का उसी धुन में पाठ किया जिस तरह मेरे पिता कवि सम्मेलनों, काव्यात्मक संगोष्ठियों में गाया करते थे और सुनाते थे… विदेशी भाषा बोलना एक मुश्किल काम है, लेकिन इसे सिर्फ बोलना ही नहीं बल्कि सुनाना और इसे इसके लेखक के अंदाज में गाना एक आश्चर्य है…’

‘मुझे इस शहर से उसी वक्त प्रेम हो गया था, जब मैंने इसकी धरती पर पैर रखा था… लोगों से मिला प्यार, उनकी मेहमाननवाजी, गर्मजोशी वाला उनका साथ और एक बाहरी व्यक्ति के लिए उनका सम्मान बिल्कुल असाधारण था… उन्होंने मेरे साथ एक बाहरी, एक पर्यटक, एक आगंतुक की तरह व्यवहार नहीं किया था… उन्होंने मेरे लिए अपने घरों के दरवाजे खोल दिए थे… उन्होंने मुझे परिवार दिया… वे मेरे साथ एक हो गए…’

‘… मुझे उस शहर और अड़ोस-पड़ोस के लोगों की याद आती है… उनका स्वागत गर्मजोशी से भरा था और इसलिए एकबार फिर उनके बीच जाने की इच्छा है… मुझे उम्मीद है कि मैं जल्द ही ऐसा कर सकता हूं… मुझे वहां हमेशा ऐसा लगता था जैसे मैं अपने घर पर हूं… व्रोकला आपका धन्यवाद… शहर के मेयर आपको भी धन्यवाद… और पौलेंड आपका भी धन्यवाद।’